मध्य प्रदेश: कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां एक अनजान इंसान भगवान बनकर सामने आता है। सतना के अस्पताल में सफाई का काम करने वाले एक साधारण से कर्मचारी संतु मास्टर ने बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़कर कहा कि मेरा खून ले लीजिए। मध्य प्रदेश के DSP संतोष पटेल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसे सुनकर दिल भर आता है।
- जिसने दिया जीवनदान, उसकी बेटी का करेंगे कन्यादान
- DSP संतोष की कहानी !
- DSP संतोष पटेल की इमोशनल स्टोरी !
- बाबाओं के चक्कर में बिगड़ी थी हालत !
वह साल था 1999 तब संतोष पटेल एक आम इंसान थे। किसी गंभीर बीमारी में उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। झाड़-फूंक और बाबाओं के चक्कर में हालात इतने बिगड़ गए कि वे मौत के बिल्कुल करीब पहुंच गए। परिजन उन्हें आनन-फानन में सतना के बिरला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने साफ कहा ऑपरेशन जरूरी है, लेकिन खून नहीं मिला तो जान बचाना मुश्किल है।
उस वक्त अस्पताल में खून देने वाला कोई तैयार नहीं था। परिवार टूट चुका था, उम्मीदें जवाब दे रही थीं। तभी अस्पताल में सफाई का काम करने वाले एक साधारण से कर्मचारी संतु मास्टर ने बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़कर कहा कि मेरा खून ले लीजिए। उस एक फैसले ने संतोष पटेल को नई ज़िंदगी दे दी। ऑपरेशन हुआ, जान बची और ज़िंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आई। वक्त बीतता गया। वही संतोष पटेल मेहनत करते-करते आज DSP बन गए। लेकिन दिल के किसी कोने में 1999 का वो एहसान हमेशा ज़िंदा रहा।
DSP बनने के बाद शुरू की खोज
26 साल बाद DSP संतोष पटेल ने संतु मास्टर को खोजने की कोशिश की, ताकि उन्हें धन्यवाद कह सकें। लेकिन जब पता चला कि संतु मास्टर अब इस दुनिया में नहीं रहे, तो वे भावुक हो उठे। अफसर की आंखें भर आईं जिस इंसान ने बिना पहचान, बिना रिश्ता, सिर्फ इंसानियत के नाते जान बचाई… वह अब नहीं रहा।
इसी भावुक पल में DSP संतोष पटेल ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने संकल्प लिया कि संतु मास्टर की बेटी का कन्यादान वही करेंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उस कर्ज़ को चुकाने की कोशिश है, जो जीवन भर उतारा नहीं जा सकता।
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