हरदोई: कछौना सीएचसी पर अभी तक मरीजों को बीपीएचयूसुविधा मिल नहीं पाई है। जबकि जिले में तमाम ब्लॉकों पर बीपीएचयू बनाकर संचालित की जा चुकी हैं। बीपीएचयू की स्वीकृति के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। ऐसे में दो सैकड़ा से अधिक मरीजों को निजी लैबों पर जाकर जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चिकित्सीय व्यवस्था बेहतर करने के साथ ही जांच की सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। शासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पब्लिक हेल्थ यूनिट शुरू की हैं। 15 वें वित्त आयोग की धनराशि से बने एक बीपीएचयू पर करीब 48 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भवन निर्माण के साथ ही करीब आठ से 10 लाख रुपये की बायोकेमिस्ट्री मशीन भी रक्त नमूनों के परीक्षण के लिए लगाई गई है।
बावन, सवायजपुर, हरपालपुर, हरियावां समेत कई ब्लॉकों में बीपीएचयू बनकर संचालित होने लगी हैं। जबकि कछौना सीएचसी पर अभी यूनिट ही नहीं बनी। बजट स्वीकृत हो चुका है और स्थान भी चिह्नित है। इसके बावजूद बीपीएचयू का लाभ न मिलने से मरीजों को निजी लैबों पर जांच कराने के लिए जाना पड़ रहा है। रोजाना दौ सैकड़ा से अधिक मरीजाें की जांच लिखी जाती है। शुगर, एचबी और रक्तचाप व किटों से होने वाली जांचों के अतिरिक्त महत्वपूर्ण जांचों के लिए मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बीपीएचयू में लगेगी बायोकेमिस्ट्री मशीन
ब्लाॅक पब्लिक हेल्थ यूनिट में बायोकेमिस्ट्री मशीन लगने के बाद जांचों का दायरा बढ़ाया जाएगा। बायोकेमिस्ट्री मशीन से एक साथ कई जांचें की जा सकती हैं। इसके लिए रक्त का नमूना लेना होता है। लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांचें इस मशीन से हो सकती हैं।
सीएचसी पर लैब टेक्नीशियन भी तैनात
सीएचसी पर बीपीएचयू तो नहीं बन पाई है लेकिन जांचों को करने के लिए बायोकेमिस्ट्री मशीन आ चुकी है और लैब टेक्नीशियन भी नियुक्त है लेकिन मशीन से काम नहीं लिया जा पा रहा है और टेक्नीशियन किटों से जांच कर खानापूर्ति कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की हीलाहवाली से मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है।ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट के लिए स्थान चिह्नित हो चुका है।
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बजट भी है लेकिन काम क्यों नहीं कराया जा रहा है इसके लिए कई बार सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है। कार्यदायी संस्था से बात कर जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। सीएचसी पर हो सकने वाली जांचें मरीजों की हो रही हैं। अन्य जांचें मरीज बाहर से ही कराते हैं। – डॉ. शैलेंद्र शुक्ला, सीएचसी अधीक्षक, कछौना