दरभंगा। स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में उदाहरण माने जाने वाले इंदौर में हाल ही में सामने आई पेयजल से जुड़ी गंभीर घटना की पुनरावृत्ति दरभंगा में भी कभी हो सकती है। शहर में नल-जल योजना का नेटवर्क तो बिछा दिया गया है, लेकिन रखरखाव की अनदेखी के कारण लोगों तक दूषित पानी पहुंचने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
शहर के कई इलाकों में आपूर्ति पाइपलाइन जर्जर हालत में है। घटिया गुणवत्ता के पाइप गर्मी और धूप के कारण जगह-जगह फट चुके हैं। पानी की आपूर्ति के दौरान नालियों का गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है और आपूर्ति बंद होते ही वही प्रदूषित पानी पाइप के माध्यम से घरों तक पहुंच जाता है।
वार्ड संख्या 29 के खान चौक से रहम खां जाने वाले मार्ग पर यह स्थिति आम हो चुकी है। जैसे ही नल-जल की आपूर्ति शुरू होती है, नालियां उफान पर आ जाती हैं और सड़क पर गंदा पानी बहने लगता है। आपूर्ति बंद होते ही नाले का वही दूषित पानी पाइप के जरिए घरों में पहुंच रहा है। यह इलाका सिर्फ एक उदाहरण है, नगर निगम क्षेत्र में ऐसे दर्जनों मोहल्ले हैं, जहां नाला और पाइपलाइन के बीच अंतर लगभग खत्म हो चुका है।
डीएमसीएच के औषधि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हर महीने शहर से ही दर्जनों मरीज पेट, लीवर और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या जलजनित रोगों से पीड़ित होती है, लेकिन आम लोगों को इसका अहसास तब तक नहीं हो पाता, जब तक बीमारी गंभीर रूप नहीं ले लेती।
दरभंगा शहर में पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के पास है। वर्षों तक जिले में पीएचईडी ही जलापूर्ति का काम करता रहा। नल-जल योजना के तहत भी इसी विभाग के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों ने पाइपलाइन बिछाई। वर्तमान में जलापूर्ति व्यवस्था नगर निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है।