संजय निषाद कौन हैं, जिन्होंने हिजाब विवाद में किया नीतीश कुमार का बचाव….

100 News Desk
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मछली पालन मंत्री और निषाद पार्टी के संस्थापक संजय निषाद ने जो बयान देकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचाव किया है, अब उस पर भी विवाद हो गया है। हालांकि आलोचना के बाद उन्होंने अपने शब्द वापस लेने की बात कही. नीतीश कुमार एक नवनियुक्त आयुष डॉक्टर का हिजाब खींचकर विवादों में घिर गए हैं। इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा और उन्हें ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ बताया।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें दिख रहा है। कि नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र देते हुए एक मुस्लिम महिला आयुष डॉक्टर के चेहरे से हिजाब खींच रहे हैं। इसके बाद संजय निषाद ने एक निजी समाचार चैनल से बात के दौरान हंसते हुए कहा, “वो भी तो एक आदमी हैं। इतना पीछे नहीं पड़ जाना चाहिए। नक़ाब छूने से इतना हंगामा हो रहा है…”

इसके बाद संजय निषाद ने एक आपत्तिजनक बात की। और वही विवादों के केंद्र में है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए संजय निषाद के बयान को ‘बेहूदा और महिला विरोधी’ बताया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 दिसंबर, 2025 को पटना, 1,283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटे।

नीतीश कुमार के व्यवहार की चर्चा अरब के मीडिया में भी, क्या भारत की छवि पर पड़ेगा असर ?

  • समाजवादी पार्टी ने भी उनके बयान की आलोचना की
  • शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने निषाद के बयान को ‘महिला विरोधी’ कहा
शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने निषाद के बयान को 'महिला विरोधी' कहा
शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने निषाद के बयान को ‘महिला विरोधी’ कहा

वहीं शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “ये इनकी महिला विरोधी सोच को दिखाता है. एक गल़त काम को सही साबित करने के लिए एक महिला की इज़्ज़त को, उसके सम्मान को दरकिनार किया जा रहा है. चाहे वो बीजेपी हो या बीजेपी के सहयोगी दल. उत्तर से लेकर दक्षिण तक, ये सब महिला विरोधी मानसिकता वाले लोग हैं.”

मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना ने लखनऊ के कैसरबाग पुलिस स्टेशन में नीतीश कुमार और संजय निषाद के ख़िलाफ़ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।विवाद बढ़ने के बाद संजय निषाद ने अपने बयान पर सफ़ाई पेश की है।

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, ” किसी को पूर्वांचल की संस्कृति का ज़रा भी ज्ञान हो तो उसे पता होता है कि गांव-देहात में ऐसा किसी बात को टालने के लिए कहा जाता है। मैंने हंसते हुए सहज भाव से वो बात कही। किसी महिला या धर्म के प्रति दुर्भावना की कोई नीयत नहीं थी। लेकिन अगर किसी को उससे धक्का पहुंचा है तो हम उस शब्द को वापस लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ज़बरदस्ती बात को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। “

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